श्रमिक ट्रेन से घर जाना चाहते हैं तो जानना चाहिए

केंद्र सरकार ने में फंसे मज़दूरों, छात्रों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों के लिए कुछ स्पेशल ट्रेन चलाने की मंजूरी दी है। 1 मई को श्रमिको के लिए स्पेशल ट्रेन चलाई गईं। आगे भी ये ट्रेन चलेंगी। लेकिन बाकी पैसेंजर ट्रेन 17 मई तक रद्द हैं। रेल मंत्रालय ने श्रमिको के स्पेशल ट्रेनों के लिए टिकट से लेकर कई चीजों की गाइडलाइंस जारी की हैं। रेलवे ने कहा कि राज्य सरकार के अनुरोध पर ही ये ट्रेन चलेंगी। जो यात्रा करना चाहता है, उन्हें राज्य सरकार से ही कॉन्टैक्ट करना चाहिए।

अगर किसी को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से जाना हो तो क्या करना होगा? रेलवे के प्रोटोकॉल क्या कहते हैं? टिकट मिलेंगे या नहीं? जानना चाहिए ।

यात्रियों को टिकट के लिए पैसा देना होगा

टिकट के बारे में रेलवे ने कहा है कि जिन राज्यों से ट्रेन जानी है, यात्रियों की संख्या वहां की राज्य सरकार पर निर्भर करेगी , जो कि एक ट्रेन के लिए लगभग 1200 (या 90 % ) होना चाहिए। इस संख्या के आधार पर जिस जगह जाना होगा, रेलवे वहां के लिए टिकट देगी और उन्हें उस राज्य सरकार को दिया जाएगा, जहां से ट्रेन चलनी है। स्थानीय अधिकारी यात्रियों को टिकट देंगे। उनसे पैसे इकट्ठा करके रेलवे को देंगे।

सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेशो को फंसे हुए लोगों को भेजने और रिसीव करने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने होंगे ये अधिकारी इन सभी लोगों का रजिस्ट्रेशन करेंगे। राज्यों से कोऑर्डिनेट के लिए रेलवे ने से नोडल अफसरों की लिस्ट जारी की है। दोनो राज्य आपस में बात कर सकते हैं और ट्रेन से लोगों को निकालने पर सहमत हो सकते हैं।
जिस राज्य से लोगों को भेजा जा रहा है, वो राज्य दूसरे राज्य से बात कर स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था करेगा। इसके लिए सभी ज़रूरी ट्रेनों के बारे में वो रेलवे के नोडल अफसरों को सूचित करेगा। राज्य की तरफ से दी गई ज़रूरत के हिसाब से रेलवे प्लानिंग करेगा। हर श्रमिक ट्रेन नॉन-स्टॉप ट्रेन होगी। यानी वो केवल अपने गंतब्य स्टेशन पे ही रुकेगी । एक ट्रेन 1200 तक लोगों को ले जा सकती है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होगा। मिडिल बर्थ खाली रहेंगी। जहां से लोगों को भेजा जा रहा है, वो राज्य यात्रियों के ग्रुप पर फैसला लेगा। ट्रेन में कम से कम 90 % यात्री होने चाहिए।
स्टेशन पे स्क्रिंनिंग होगी
जिस राज्य में प्रवासी जा रहे हैं, वहां की परमिशन भेजने वाले राज्य को लेनी होगी जो की अनिवार्य है और रेलवे को इसकी कॉपी देनी होगी। लोगों को भेजने से पहले स्टेशन पर लोगों की स्क्रीनिंग होगी। जो COVID-19 निगेटिव पाए जाएंगे, उन्हें ही परमिशन मिलेगा । राज्य इस बारे में सर्टिफिकेट देगा। साथ ही एक लिस्ट भी दी जाएगी , जिसमें यात्रियों के मोबाइल नंबर और पता होगा । रेलवे के पास अधिकार होगा कि अगर कोई COVID-19 पॉजिटिव पाया जाता है तो उसे ट्रेन में चढ़ने से रोक दे।

किससे संपर्क करें
१ बहुत से मजदूरों-छात्रों को अभी राज्यों के तरफ से पूरी जानकारी नहीं मिली है कि उन्हें श्रमिक ट्रेन से लौटने के लिए कहांऔर किससे बात करना होगा।

२ रेलवे के सीपीआरओ दीपक कुमार के अनुसार इसके लिए नोडल अफसरों से संपर्क करना होगा। वो इन लोगों से संपर्क करेंगे और इनका रजिस्ट्रेशन करवाएंगे ।

३ कुछ राज्यों ने अलग-अलग राज्यों के लिए नोडल अफसरों के नंबर दिए गए हैं। जैसे- दिल्ली, तमिलनाडु और बिहार। इसके अलावा यूपी और उत्तराखंड सरकार ने हेल्पलाइन नंबर भी दिए गए हैं हैं। जैसे- दिल्ली से यूपी जाने के हेल्पलाइन नंबर हैं: 8920827174
9454400114, 945442535 ।
स्थानीय पुलिस को एक फार्म भरकर देना होगा जब पुलिस प्रशासन उसको स्वीकार करेगा तब पास दिया जायेगा । इस बारे में आपको और आपके राज्य को जानकारी दी जाएगी वो फ़ोन या ईमेल के माध्यम से दिया जा सकता है

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