चीन ने भारत का भरोसा तोडा LAC पर भारत के 20 जवान शहीद और कई अभी भी लापता

चीन ने एक बार फिर से भारत का भरोसा तोडा है और पीठ पे छुरा भोका है। जब हमारे देश के जवान सीमा पे बातचीत दौरान अचानक हमला किया

सोचने वाली बात तो ये भी है की सरकार भी आकड़े छुपा रही है। दोनों तरफ की सरकारें ऐसा कर रही हैं। हलाकि चीन का कायरता पूर्ण हरकत ये पहली बार नहीं है लगता है सरकार ने इतिहास से कुछ नहीं सीखा। डिप्लोमेसी के आड़ में पता नहीं कौन से निति का पालन कर रहे है चीन को सबक सिखाने का एक ही तरीका है की हमेशा उसके दस गुना तेज़ी से जवाब दिया जाये जब तक ऐसा नहीं किया जाता तब तक चीन ऐसा ही करता रहेगा।
हमें विस्वास न हो १९६२ का इतिहास देख ले नेहरू जी ने इसी निति का पालन किया था नतीजा ये हुआ की भारत हजारो किलोमीटर पे चीन का कब्जा हो गया ।

एक तो चीन बात से मामला हल करने की बात करता है दूसरी तरफ पूरी तैयारी के साथ भारतीय सेना पे हमला करा रहा है और भारत के क्षेत्र का अपना बता कर भारत पे ही सीमा उल्ल्घन की बात करता है और ऐसे में भारतीय सरकार आकड़े रुक रुक कर पेश कर रही है ऐसा करके सरकार केवल जनता से आँख मिचौली कर सकती है लेकिन चीन विवाद से हल नहीं निकाल पायेगी अगर चीन से विवाद से निजात पाना है तो सीधे तौर पे कहना होगा की चीन अपनी हद में रहे जैसा की चीन बोल रहा है।
हमें सठे सठिये समां चरेट निति अपनाना होगा अब कड़ी निंदा से काम नहीं चलेगा।
हम आसान शब्दों में ऐसे समझ सकते हैं चीन हमारे उस लतखोर पडोसी जैसा है की जिससे जितना ही अच्छे से बात किया जाये वो हमारी ही जमीन को अपना बता रहेगा और जब हम उसको को ये बता दे की अगर वो शांति से रहेगा तो वो बचा रहेगा नहीं तो उसकी जमीन तक नहीं रहेगी
आगे में अपने रिसर्च में ये साबित भी करूँगा

इंडो चीन वॉर 1967

1967 के लड़ाई के दौरान भारत की 2 ग्रेनेडियर्स बटालियन के जिम्मे नाथू ला की सुरक्षा जिम्मेदारी थी. नाथु ला दर्रे पर सैन्य गश्त के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच अक्सर धक्का मुक्की होते रहती थी. 11 सितंबर 1967 को धक्कामुक्की की एक घटना से सबक लेते हुए नाथू ला से सेबु ला के बीच में तार बिछाने का फैसला लिया. जब बाड़बंदी का कार्य शुरु हुआ तो चीनी सैनिकों ने विरोध किया. इसके बाद चीनी सैनिक तुरंत अपने बंकर में लौट आए. कुछ देर बाद चीनियों ने मेडियम मशीन गनों से गोलियां बरसानी शुरु कर दीं. प्रारंभ में भारतीय सैनिकों को नुकसान उठाना पड़ा. पहले 10 मिनट में 70 सैनिक मारे गए.
हमारी सेना ने भी इस बार चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए गोले दागने शुरू कर दिए. इस लड़ाई का नेतृत्व करने वाले थे 17 वीं माउंटेन डिवीजन के मेजर जनरल सागत सिंह. लड़ाई के दौरान ही नाथू ला और चो ला दर्रे की सीमा पर बाड़ लगाने का काम किया गया ताकि चीन फिर इस इलाके में घुसपैठ की हिमाकत नहीं कर सके.
इस टुकड़ी का नेतृत्व कर्नल राय सिंह यादव कर रहे थे जो लन्दन में पढ़ाई के दौरान ही चीन की मानसिकता का पूरा रिसर्च किया था वो चीन से पूरी तरह वाकिफ थे। उन्हें चीन के चाल का अंदाजा था इसीलिए जब चीन ने फायरिंग किया तो इन्होने पूरी तरह से फायरिंग और बमो से चीन का जवाब दिया नतीजा ये हुआ की कर्नल राय सिंह यादव के अगुवाई में भारतीय सेना ने अपनी 8० जवानो के बदले चीन 4०० जवानो को मौत के घाट उतार दिया ये वो अकड़ा है जो चीन सरकार ने जारी किया था हकीकत में चीन के इससे बहुत ज्यादा सैनिक मारे गए थे

इस तरह 1967 की इस लड़ाई में भारतीय सेना ने चीनी हमलों को नाकाम कर दिया. लड़ाई के बाद घायल कर्नल राय सिंह यादव को महावीर चक्र, शहादत के बाद कैप्टन डागर को वीर चक्र और मेजर हरभजन सिंह को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया. बताया जाता है कि लड़ाई के दौरान जब भारतीय सेना के जवानों की गोलियां खत्म हो गईं तो बहादुर अफसरों एवं जवानों ने अपनी खुखरी से कई चीनी अफसरों एवं जवानों को मौत के घाट उतार दिया था.

1967 के ये दोनों सबक चीन को आज तक सीमा पर गोली बरसाने से रोकते हैं. तब से आज तक सीमा पर एक भी गोली नहीं चली थी लेकिन चीन फिर से भूल गया है उसे उसी की भासा में फिर से जवाब देने की जरुरत है देखते हैं हमारी सरकार कैसे जवाब देती है

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *