औरंगाबाद में ट्रेन के चपेट में आने से 16 मजदूरों की मौत 4 घायल बिखरी रोटियां बहुत कुछ कह रही


आज सुबह लगभग 4:3० बजे को एक ह्रदय विदारक घटना औरंगाबाद में हुई ट्रैन की पटरी पे सो रहे 16 मजदूरों की मौत हो गयी और 4 लोग घायल हो गए ये मजदूर जालना में एक फैक्ट्री काम करते थे और पैदल ही मध्यप्रदेश जा रहे थे ।

शायद आगे जाकर कोई स्टेशन मिलता जहा से वो कोई ट्रैन पकड़ते उनको ये जानकारी नहीं थी की ट्रेने कहा से कहा के लिए चल रही हैं वो ट्रैक पर सो रहे थे और हादसे के शिकार हो लेकिन बात चाहे जो भी हो वो पूरी तरह से महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार के दावों की कठोर सत्यता उजागर करती है ।

ये घटना पूरी तरह से दिखाती है की किसी भी सरकार किये गए कार्य गरीबो के लिए बिलकुल भी उपयोगी नहीं सिद्ध हो पाए हैं ।
क्यूकी गरीबो का जो तबका है वो ये समझ गया है की सरकार कुछ नहीं करेगी

सरकार पर लोगो को भरोसा नहीं रहा क्यूकी वो इतने दिन जरूर परेशान हो रहे होंगे तभी ,उनको इतना पैदल जाने का निर्णय लेना पड़ा होगा । और सरकार कह रही की पैदल जाने वाले लोगो पर कार्यवाही होगी ।

मै कहता हु कार्यवाही नहीं व्यवस्था कीजिये और नियमो को पारदर्शी बनायें और लोग भी संयम बरते ऐसे न निकलें । फिर किसी को भी शौक नहीं होगा की वो ऐसे पैदल जाये ।खैर सभी लोगो के संवेदनाये देने की भी कतार लग गयी है लेकिन उससे क्या

बात ये भी है की सरकार ने श्रमिकों के लिए स्पेशल ट्रेनें भी चल रही हैं लेकिन उसके प्रोटोकॉल्स ऐसे हैं की जो अच्छे अच्छे के समझ में ना आये केंद्र और राज्य सरकार के बीच टिकट के पैसे को लेकर भी खींचतान भी नहीं सुलझी है अगर ये सारी चीजे अच्छे से हो तो बहुत से मजदूरों की जिंदगी बच जाये लेकिन इनकी पड़ी किसको है जिस रोटी के लिए भटक रहे है वो आखिर में पटरी पे बिखर गयी और सारी कहानी चीख चीख सुना रही है लेकिन फिर भी किसी को सुनाई नहीं दे रहा खैर उनका इस तरह से जाना बहुत सी बातों को बयां करती हैं शायद किसी को सुनाई दे
by N N Yadav

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