किसान आंदोलन अन्नदाता का संघर्ष सही या गलत

किसानो ने एकबार फिर से चक्का जाम लगाया है। लेकिन इसमें हमें जानना चाहिए की आंदोलन क्यों हो रहा है आइये एकबार तीनो कानून समझते हैं और जड़ का पता लगते हैं।

1 कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020
किसानो के आंदोलन करने का सबसे बड़ा कारण यह की सरकार की ज्यादातर कमीटीएस ने बार बार कहा है की सरकार को अपना खर्च कम करना चाहिए। इसका मतलब ये है की सरकार की सब्सिडी कम से कम करना चाह रही है जो की कृषि के तीनो कानून के रूप में शुरुआत कर रही है। सरकार का बहुत सारा पैसा सब्सिडी देने में चला जाता है जिससे सरकार पे बहुत बोझ पड़ता है।
आज नहीं तो कल ये फैसला करना ही था। सरकर तीनो कृषि कानूनों के तहत किसानो के को बाजार प्रदान करना चाह रही है जिससे की किसानो की सरकार पे निर्भरता कम हो जाये और किसान अपना फसल आपंक में ही बेचने का इंतजार ना करें
बताते चलें की बिहार में भी कृषि सुधर के नाम पे किसानो की स्थिति सुधरने के लिए APMC को समाप्त कर दिया गया है और उसके परिणाम देखे तो बिहार के किसानो का इससे जरा सा भी सुधार नहीं हुआ बल्कि उनको अपना फसल पंजाब में बेचना पड़ रहा है क्युकी वहा पे उनको उनको फसल का अच्छा मूल्य नहीं मिल रहा तो किसान ये मान रहे हैं अगर वह पे कोई फायदा तो नहीं हुआ तो देश में कैसे होगा और दूसरा डर APMC की मंडिया ख़त्म होने का डर सता रहा है

2-मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवाओं पर कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) अनुबंध विधेयक २०२०
इस नियम के अनुसार अनुबंध के अनुसार खेती करनी होगी जो की बड़ी बड़ी कम्पनिया कराएंगी किसानो का सबसे बड़ा डर ये है की किसी बड़ी कंपनी से अनुबंध में उनका घाटा हो सकता है क्युकी कम्पनिया बड़ी ही चालाकी से काम लेती हैं और और कई तरह के टर्म और कंडीशन लगा देती है जिससे उनका घाटा हो सकता है या फिर उनकी जमीन जा सकती उनका मानना है की अगर कंपनी चालाकी दिखाती है तो वो उसका सामना नहीं कर पाएंगे

३ आवश्यक वस्तु संशोधन बिल २०२०- इस बिल के अनुसार अब आवश्यक वस्तुओ जैसे खाद्य तेल , दाल , प्याज और आलू इत्यादि का भण्डारण किया जा सकता है अब ऐसे में कोई भी किसान तो इतना बड़ा गोदाम बना नहीं सकता अगर कम्पनिया बड़े बड़े गोदामों में प्याज या आवश्यक वस्तुओ का भरी मात्रा में भण्डारण करके इनका प्राइस बढ़ा सकता है इससे कालाबाजारी बढ़ने का खतरा है और आवश्यक वस्तुओं का मूल्य बढ़ने का खतरा है इसका सीधा फायदा ज्यादातर बड़ी कंपनियों को ही मिलेगा

इसलिए आज के दिन ६ फरवरी के दिन किसान चक्का जाम कर रहे हैं इसके मुख्य नेता राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव इसे रोटी के लिए संघर्ष बता रहे और ये कह रहे है की रोटी तिजोरी में बंद न हो इसलिए ये आंदोलन किया जा रहा ह।
इसमें बहुत से लोगो का मिलाजुला रिएक्शन आ रहा है कुछ लोग किसानो को आतंकवादी तक बता दिए है जबकि लोगो को ये जानना चाहिए की शांति से आंदोलन करना लोकतान्त्रिक अधिकार है ऐसे लोगो का अपने देश के संविधान के बारे में जानना चाहिए और ये याद रखना चाहिए की जब अपने देश की जीडीपी -२३ तक गयी थी तो किसानो ने देश की जीडीपी को भी संभाला और कोरोना में लोगो अनाजों से लोगो को भी बचाया।

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